नई दिल्ली: शशि थरूर का बयान—आपातकाल केवल ‘काला अध्याय’ नहीं, लोकतंत्र के लिए चेतावनी है

New Delhi: Shashi Tharoor's statement- Emergency is not just a 'dark chapter', it is a warning for democracy

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और पार्टी की कार्यसमिति के सदस्य डॉ. शशि थरूर ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को लेकर बड़ा और विचारोत्तेजक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल भारत के इतिहास का एक ‘काला अध्याय’ नहीं था, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।

थरूर ने कहा, “अनुशासन और व्यवस्था के नाम पर जो कार्रवाइयां की गईं, वे कई बार क्रूरता में बदल गईं, जिन्हें किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।” उन्होंने विशेष रूप से उस दौर की नीतियों की आलोचना की, जिनमें संजय गांधी द्वारा चलाया गया जबरन नसबंदी अभियान और शहरी झुग्गियों को तोड़ने की घटनाएं शामिल हैं। थरूर ने कहा कि ये सभी कदम लोकतंत्र की भावना के खिलाफ थे और इनसे हजारों आम नागरिक प्रभावित हुए।

थरूर ने आगे लिखा कि आज भारत एक आत्मविश्वासी, विकसित और सशक्त लोकतंत्र है, लेकिन आपातकाल से मिले सबक आज भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता का केंद्रीकरण और असहमति को दबाने की प्रवृत्तियां फिर से उभर सकती हैं, इसलिए लोकतंत्र के समर्थकों को हमेशा सजग और सतर्क रहना होगा।

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